Life Insurance (जीवन बीमा) क्या है और कितने प्रकार के होते हैं ?

Life Insurance (जीवन बीमा) क्या है और कितने प्रकार के होते हैं ? तथा लाइफ इन्शुरन्स क्यों जरुरी है पूरी जानकारी हिंदी में

Life Insurance, जिसे हम “जीवन बीमा” के नाम से भी जानते है और यह बीमा कई प्रकार का हो सकता है। लेकिन सभी का उद्देश्य एक ही होता है। सभी अलग़-अलग़ चीज़ों के लिए विभिन्न प्रकार की schemes होती है। जैसे – life insurance, health insurance, animal insurance, vehicle insurance, या अन्य प्रकार का insurance इत्यादि।

जीवन बीमा मृत्यु, विकलांगता, दुर्घटना (एक्सीडेंट), रिटायरमेंट आदि जैसे मानव जीवन से जुड़ी आकस्मिकता (अचानक दुर्घटना) के लिए वित्तीय सुरक्षा है।

मानव जीवन प्राकृतिक और दुर्घटना के कारण मृत्यु एवं विकलांगता की आशंका के अधीन है। जब मानव जीवन समाप्त हो जाता है या स्थायी अथवा अस्थायी रूप से कोई व्यक्ति विकलांग हो जाता है, तो परिवार के लिए आय की क्षति हो जाती है।

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जीवन बीमा (Life Insurance) क्या है ?

जीवन बीमा या लाइफ़ इंश्योरेंस किसी व्यक्ति (बीमाधारक) और बीमा कम्पनी के बीच एक लिखित अग्रीमेंट होता है, जिसके अनुसार व्यक्ति की मृत्यु पर कम्पनी एक पूर्वनिर्धारित राशि उसके बेनेफिशरी को देने का वादा करती है।

इसके बदले व्यक्ति को एक नियमित प्रीमियम भरना होता है। अन्य घटनाओं, जैसे गंभीर बीमारी या विकलांगता के कारण राशि का भुगतान हो सके। कई जीवन बीमा Policy में निवेश का विकल्प भी होता है।

हालांकि मानव जीवन का मूल्य नहीं निकाला जा सकता है, लेकिन आने वाले वर्षों में आय की क्षति के आधार पर एक आर्थिक धनराशि निर्धारित की जा सकती है।

अतः जीवन बीमा में सुनिश्चित राशि या क्षति की स्थिति में भुगतान के लिए गारंटी राशि ‘लाभ’ का मार्ग है। जीवन बीमा योजनाएं पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति की मृत्यु या दुर्घटना (एक्सीडेंट) की वजह से अपंगता की स्थिति में निश्चित धनराशि प्रदान करती हैं।

भारत में बहुत कम लोग ही जीवन बीमा करवाते हैं। बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आई. आर. डी. ए. आई.) की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि 2018 में भारत में मात्र 3.69% लोगों ने जीवन बीमा करवाया था।

विकसित देशों के मुक़ाबले यह संख्या काफ़ी कम है। 2015 से 2017 तक भारत में जीवन बीमा पेनिट्रेशन 2.7% पर टिकी रही। इसका कारण भारतीय उपभोक्ता (consumer) में जागरूकता की कमी है।

इस कैम्पेन का उद्देश्य यह हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इंश्योरेंस के प्रति जागरूक हों, और बीमा करवाएँ। यह अभियान भारत की सभी मुख्य भाषाओं जैसे तमिल, तेलुगु, बंगला, मलयालम और कन्नड़ में चलाया जा रहा है।

विज्ञापन, मीडिया कवरेज, ऑन-ग्राउंड ऐक्टिवेशन, डिजिटल और सोशल मीडिया सभी माध्यमों द्वारा देशवासियों तक पहुँचने का प्रयास किया जा रहा है। इस अभियान द्वारा जीवन बीमा परिषद (Life Insurance Organization), इंश्योरेंस को भारतीयों की सोच में वह स्थान दिलाना चाहता है, जिसका वह हकदार है।

जीवन बीमा अनुबन्ध के आधारभूत सिद्धान्त

  • बीमा योग्य हित
  • परम् सद्विश्वास
  • जीवन बीमा प्रसंविदा, क्षतिपूर्ति की प्रसंविदा नहीं है, जीवन के हानि की क्षतिपूर्ति सम्भव नहीं है।

Life Insurance (जीवन बीमा) कितने प्रकार के होते हैं ?

जीवन बीमा (Life Insurance) आपके साथ-साथ आपके परिवार के भी काम आता है। अगर परिवार का एकमात्र कमाने वाला शख्स मुखिया है तो उसके जाने के बाद लाइफ इंश्योरेंस उस पर निर्भर लोगों को कुछ हद तक वित्तीय (financial) तौर पर राहत दे सकता है।

लाइफ इंश्योरेंस केवल एक तरह का नहीं होता है। कुछ पॉलिसी आपको कवर के साथ-साथ निवेश के जरिए रिटर्न पाने का भी विकल्प देती हैं। आप अपनी जरूरत के आधार पर लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के 7 टाइप में से चुनाव कर सकते हैं।

1. टर्म इंश्योरेंस प्लान

यह प्लान एक निश्चित समय के लिए खरीदा जा सकता है; जैसे 10, 20 या 30 साल। इस प्लान के तहत आपको आपके द्वारा चुने गए एक टेनर यानी अवधि के लिए कवरेज मिलता है। ऐसी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में मैच्योरिटी बेनिफिट नहीं होता।

ये सेविंग्स/प्रॉफिट कंपोनेंट के बिना लाइफ कवर उपलब्ध कराती हैं। लिहाजा ये अन्य पॉलिसी की तुलना में सस्ती होती हैं। टर्म इंश्योरेंस में पॉलिसी टर्म के दौरान पॉलिसी धारक की मृत्यु होने पर पॉलिसी के तहत एश्योर्ड सम यानी एक तय रकम बेनि​फीशियरी को दी जाती है।

2. एंडोमेंट पॉलिसी

इस तरह की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में बीमा और निवेश दोनों होते हैं। इस पॉलिसी में एक निश्चित अवधि के लिए रिस्क कवर होता है और उस अवधि के खत्म होने पर बोनस के साथ एश्योर्ड सम पॉलिसीधारक को वापस किया जाता है।

पॉलिसीधारक की मौत होने या निर्धारित सालों के बाद एंडोमेंट पॉलिसी के तहत पॉलिसी अमाउंट की फेस वैल्यू का भुगतान किया जाता है। कुछ पॅलिसी गंभीर बीमारी के मामले में भी भुगतान करती हैं।

3. मनीबैक इंश्योरेंस पॉलिसी

ये पॉलिसी एक तरह की एंडोमेंट पॉलिसी ही है, इस पॉलिसी में भी निवेश और बीमा का मेल है। अंतर इतना है कि इस लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में बोनस के साथ एश्योर्ड सम पॉलिसी टर्म के दौरान ही किस्तों में वापस किया जाता है।

आखिरी किस्त पॉलिसी खत्म होने पर मिलती है। अगर पॉलिसी टर्म के दौरान पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है तो पूरा एश्योर्ड सम बेनिफीशियरी को मिलता है। हालांकि इस पॉलिसी का प्रीमियम सबसे ज्यादा होता है।

4. आजीवन लाइफ इंश्योरेंस

आजीवन लाइफ इंश्योरेंस यानी Whole Life Insurance Plan में आपको जीवनभर प्रोटेक्शन मिलता है। यानी पॉलिसी का कोई टर्म नहीं होता। पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर, नॉमिनी को बीमा का क्लेम मिलता है। अन्य लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में उम्र की एक मैक्सिमम लिमिट होती है, जो आमतौर पर 65—70 साल होती है।

उसके बाद मौत होने पर नॉमिनी डेथ क्लेम नहीं ले सकता। लेकिन आजीवन लाइफ इंश्योरेंस के तहत पॉलिसीधारक की मौत 95 साल की उम्र में ही क्यों न हुई हो, नॉमिनी क्लेम कर सकता है। इस पॉलिसी का प्रीमियम काफी ज्यादा रहता है।

इस पॉलिसी के तहत पॉलिसीधारक के पास इंश्योर्ड सम को आंशिक रूप से Withdraw करने का विकल्प रहता है। इसके अलावा वह पॉलिसी के एवज में पैसा लोन के तौर पर भी ले सकता है।

5. यूलिप

इस प्लान में प्रोटेक्शन और निवेश दोनों रहते हैं। ट्रेडिशनल यानी एंडोमेंट इंश्योरेंस पॉलिसी और मनीबैक पॉलिसी में मिलने वाला रिटर्न एक हद तक पक्का होता है, वहीं यूलिप में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती है।

इसकी वजह है कि यूलिप में निवेश वाले हिस्से को बॉन्ड और शेयर में लगाया जाता है और म्यूचुअल फंड की तरह आपको यूनिट मिल जाती है। ऐसे में रिटर्न मार्केट के उतार-चढ़ाव पर आधारित होता है।

हालांकि आप तय कर सकते हैं कि आपका कितना पैसा शेयर में लगे और कितना पैसा बॉन्ड में लगे।

6. रिटायरमेंट प्लान

इस प्लान में लाइफ इंश्योरेंस कवर नहीं मिलता है, यह एक रिटायरमेंट सॉल्यूशन प्लान है। इसके तहत आप ​अपने रिस्क का आकलन कर एक ‘रिटायरमेंट फंड’ बना सकते हैं।

तय की गई एक अवधि के बाद आपको या आपके बाद बेनि​फीशियरी को पेंशन के तौर पर एक निश्चित रकम का भुगतान किया जाएगा। यह भुगतान मासिक, छमाही या सालाना आधार पर हो सकता है।

7. चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी

ये प्लान बच्चों की शिक्षा के खर्च और अन्य जरूरतों को देखते हुए डिजाइन किए गए हैं। चाइल्ड प्लान में पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद एकमुश्त रकम का भुगतान किया जाता है लेकिन पॉलिसी खत्म नहीं होती है।

भविष्य के सारे प्रीमियम माफ कर दिए जाते हैं और इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसीधारक की ओर से निवेश जारी रखती है। बच्चे को एक निश्चित अवधि तक पैसा मिलता है।

जीवन बीमा का महत्व (Importance Of Life Insurance)

  • असमय मृत्यु से संरक्षण
  • वृद्धावस्था के लिए बचत
  • बचत को बढ़ावा मिलता है।
  • निवेश की पहल
  • साख – जीवन बीमा पॉलिसी की जमानत पर ऋण मिल सकता है।
  • सामाजिक सुरक्षा
  • जोखिम स्थानान्तरण

भारत की जीवन बीमा कंपनियों की सूची

  1. बजाज अलियांज लाईफ इंश्योरेंस
  2. बिरला सनलाईफ लाईफ इंश्योरेंस
  3. एचडीएफ़सी स्टैंडर्ड लाईफ इंश्योरेस
  4. आईसीआईसीआई प्रुडेंशल लाईफ इंश्योरेंस
  5. एक्साइड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
  6. भारतीय जीवन बीमा निगम
  7. मैक्स न्यूयार्क लाईफ इंश्योरेंस कं लिमिटेड
  8. मेट लाईफ इंडिया इंश्योरेंस कं लिमिटेड
  9. कोटक महिंद्रा ओल्ड म्यूचल लाईफ इंश्योरेंस लिमिटेड
  10. एसबीआई लाईफ इंश्योरेंस कं लिमिटेड
  11. टाटा एआईजी लाईफ इंश्योरेंस कं लिमिटेड
  12. रिलायंस लाईफ इंश्योरेंस कं लिमिटेड
  13. अविवा लाईफ इंश्योरेंस कं इंडिया प्रा. लिमिटेड
  14. सहारा इंडिया लाईफ इंश्योरेंस
  15. भारती एक्सा लाईफ इंश्योरेंस
  16. फ्यूचर जनरालि लाईफ इंश्योरेंस
  17. आईडीबीआई फोर्टीज़ लाईफ इंश्योरेंस

Conclusion

यदि आप भी life insurance कराना चाहते हो तो आप ऊपर दिए गए Insurance कंपनियों के पोर्टल पर visit कर सकते हो।

उम्मीद हैं कि आपको यह लेख जीवन बीमा (Life Insurance) क्या है और कितने प्रकार के होते हैं ? तथा लाइफ इन्शुरन्स क्यों जरुरी है – पूरी जानकारी हिंदी में जरूर पसंद आया होगा। अगर फिर भी आपको इस article को लेकर कोई doubts है तो आप comment लिख सकते हैं।

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